आलपीन के सिर होता – रमापति शुक्ल की बाल कविता

आलपीन के सिर होता - रमापति शुक्ल की बाल कविता आलपीन के सिर होता पर बाल न होता उसके एक । कुर्सी के दो बाँहें हैं पर गेंद नहीं सकती है फेंक । कंधी के हैं दाँत मगर वह चबा नहीं सकती खाना । गला सुराही का है पतला किंतु न गा सकती गाना । …