शेखचिल्ली कौन था उसका जीवन परिचय और किस्से जानें शेख चिल्ली के बारे में विस्तार से

शेखचिल्ली कौन था उसका जीवन परिचय और किस्से जानें शेख चिल्ली के बारे में विस्तार से

हरियाणा के कई ‘अनमोल रत्न’ भी ऐतिहासिक दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। उनमें से एक हैं शेखचिल्ली।

शेखचिल्ली कौन था

हम अपने जीवन कई बार लोगों से सुनते हैं कि फलाना शख्स तो शेखचिल्ली की तरह बात कर रहा है। यह वो नाम है, जो अपनी कल्पनाओं और खयाली पुलाव के लिए प्रसिद्ध रहा है। अगर कुरुक्षेत्र महाभारत के लिए प्रसिद्ध है तो उससे कुछ ही दूरी पर स्थित थानेसर शेखचिल्ली के कारनामों के लिए।

कहां से आया शेखचिल्ली

हातिम ताई के किस्से, मुल्ला नसररूद्दीन के किस्से अरब देशों से भारत आए, उसी तरह शेख चिल्ली के किस्से भी आए। ये किस्से मूर्खता और हंसी की बातों के लिए प्रसिद्ध हुए।

अगर कोश में ‘शेखचिल्ली’ शब्द का अर्थ देखें तो उसमें लिखा है- ‘एक कल्पित मूर्ख जिसकी मूर्खता की अनेक कहानियां जन-साधारण में प्रसिद्ध हैं। इसी के साथ यह भी लिखा है- ‘बड़ी-बड़ी हवाई योजनाएं बनाने वाला व्यक्ति।’

शेखचिल्ली की कई कहानियां ऐसी ही हैं जिसमें उसने छोटी-सी चीज, जैसे – दही की हांडी से कल्पना करते-करते महल बनाया, शादी हुई, बच्चे हुए, फिर गुस्से में एक लड़के को लात मारी, जो असल में दही की हांडी में लगी और वह फूट गई।

शेखचिल्ली का सारा सपना बिखर गया इसलिए उसे हवाई योजनाएं बनाने वाला कहा गया

मिलिए शेखचिल्ली से

शेखचिल्ली के बारे में यही कहा जाता है कि उसका जन्म किसी गांव में एक गरीब शेख परिवार में हुआ था। पिता बचपन में ही गुजर गए थे, मां ने पाल-पोस कर बड़ा किया। मां सोचती थी कि एक दिन बेटा बड़ा होकर कमाएगा तो गरीबी दूर होगी।

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उसने बेटे को पढ़ने के लिए मदरसे में दाखिला दिला दिया। सब बच्चे उसे ‘शेख’ कहा करते थे। मौलवी साहब ने पढ़ाया, लड़का है तो ‘खाता’ है और लड़की है तो ‘खाती’ है । जैसे रहमान जा रहा है, रजिया जा रही है।

एक दिन एक लड़की कुएं में गिर पड़ी। वह मदद के लिए चिल्ला रही थी। शेख दौड़कर साथियों के पास आया और बोला वह मदद के लिए चिल्ली रही है। पहले तो लड़के समझे नहीं। फिर शेखचिल्ली उन्हें कुएं पर ले गया। उन्होंने लड़की को बाहर निकाला। वह रो रही थी।
शेख बार-बार समझा रहा था- ‘देखो, कैसे चिल्ली रही है। ठीक हो जाएगी।

किसी ने पूछा- ‘शेख! तू बार-बार इससे ‘चिल्ली-चिल्ली क्यों कह रहा है?

शेख बोला- ‘लड़की है तो ‘चिल्ली’ ही तो कहेंगे। लड़का होता तो कहता चिल्ला मत।

लड़कों ने शेख की मूर्खता समझ ली और उसे ‘चिल्ली-चिल्ली’ कहकर चिढ़ाने लगे।

उसका तो फिर नाम ही ‘शेखचिल्ली हो गया।

असल बात फिर भी शेख चिल्ली की समझ में न आई। न ही उसने नाम बदलने का बुरा माना।

ऐसे नामकरण हुवा अपने शेखचिल्ली का और एक नाम था शेखचिल्ली का हवाई योजनाएं बनाने वाला

शेखचिल्ली का मकबरा

थानेसर में शेखचिल्ली का बड़ा ही खूबसूरत मकबरा मौजूद है। शेखचिल्ली अपने समय के बड़े सूफी संतों में से एक थे, जिन्हें अब्द उर्र रहीम, अलैस अब्द उइ करीम, अलैस अब्द उर्र रज्जाक के नाम से भी जाना जाता था। यह मुगल बादशाह और औरंगजेब के बड़े भाई दारा शिकोह के आध्यात्मिक गुरु भी थे। मकबरे का निर्माण पर्शियन स्थापत्य कला के प्रभावित है।

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शेखचिल्ली एक ऐसा कथा-नायक है जो आम लोक-जीवन के संघर्षों से बार-बार उबरता है और बार-बार उन्हीं संघर्षों में जुट जाता है। उसमें ईमानदारी है, निष्ठा है, मर्यादा है, परिस्थितिजन्य विवेक है, लगन और उत्साह है और इन सबसे बड़ी बात यह भी है कि वह अपने वर्तमान में जीता है।

शेखचिल्ली (Sheikh Chilli) – शेखचिल्ली का जन्म

ऐसा माना जाता है कि शेख चिल्ली का जन्म बलूचिस्तान के खानाबदोश कबीले में हुआ था। लगातार घुमक्कड़ी का जीवन जीने के कारण चिल्ली कभी भी पढ़ न सके। चिल्ली बचपन से ही चमत्कारों की तलाश में पीर-फकीरों के दीवाने रहे। यह जमाना ही अंधविश्वासों, झाडफ़ूंक और गंडे-ताबीजों का था।
एक किवदंती के अनुसार शेख की बेसिरपैर की हरकतों से परेशान होकर एक रात कबीले वाले किसी सूखी झाड़ियों के झुंड के पास इन्हें सोता छोड़कर आगे निकल गए, इससे वो अकेले रह गए थे। अकेले होने के कारण उनकी कल्पनाओं को पंख लगा दिए। यहीं से शुरु हुआ उनकी कपोल कल्पनाओं और अजीबोगरीब कारनामों का सफर।

शेखचिल्ली जीवन परिचय

सूफी संत शेख मिर्च, जिसे सूफी अब्द-उर-रजाक भी कहा जाता है; शेख मिर्च के नाम से लोकप्रिय रूप से जाना जाता है, वह एक कदिरिया सूफी था, वह अपने ज्ञान और उदारता के लिए जाना जाता था।

वह सम्राट शाहजहां के बड़े पुत्र मुगल राजकुमार दारा शिको (AD 1650) के मालिक थे। बहुत से लोग उन्हें एक मानते हैं ग्रीस दारेश। कुरुक्षेत्र के पास भारत के हरियाणा के थानेसर में स्थित एक शेख चिली का मकबरा है।

भारत के उपमहाद्वीप में बच्चों के बीच एक प्रसिद्ध चरित्र शेख चिली, उनकी अनुयायियों और सादगी के लिए कुख्यात है। शेख चिली के चरित्र को जिम्मेदार गुणवत्ता यह थी कि उन्होंने प्रकृति के नियमों की परवाह नहीं की थी।

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उन्होंने हवा में महलों का निर्माण किया और उनकी कल्पना में महान व्यवसाय स्थापित किए, साम्राज्यों, राजकुमार बन गए, एक राजकुमार से विवाह किया- और कहानी के अंत में हवा में महल गायब हो गया और शेख चिली ने उन्हें हंसते हुए लोगों से घिरा पाया

अतीत की स्मृतियों को उलीचता हुआ, वर्तमान की राह बनाता हुआ यह पात्र कभी भविष्य की चिन्ता में डूबता-उतराता नहीं है। जीवन के उतार-चढ़ाव में संयत रहते हुए मनमौजी जीवन जीता हुआ शेखचिल्ली कई बार हमें मूर्ख या बेवकूफ प्रतीत होता है किन्तु उसकी अजीबो गरीब हरकतों में समय की ऐसी समझ समाई रहती है कि पाठक उसकी सराहना किए बिना नहीं रह सकता।

ये कहानियाँ शेखचिल्ली की कारस्तानियों का मनोरंजक विस्तार हैं। इस संग्रह में शेखचिल्ली की अलग-अलग कहानियाँ किसी माला में गूँथे गए मनकों की तरह पिरोई गई हैं। इस कथा-संग्रह की विशेषता है कि शेखचिल्ली के जीवन के कालखंडों को दर्शाती कथाओं को इसमें इस तरह रखा गया है कि उनका अलग अस्तित्व बना रहे और उसके जीवन की विकास-यात्रा की निरन्तरता का भी पता चलता रहे।

शेखचिल्ली के किस्से

आज भी उसकी कहानियाँ जहाँ हमें हँसाती हैं वहीं जुल्म का सामना करने का साहस भी प्रदान करती हैं। रोचक और सरल भाषा में लिखी गई ये कहानियाँ पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने का वादा करती हैं और दावा भी कि कोई है जो इन्हें पढ़कर हँसे बिना रह सके! शेखचिल्ली के किस्से आप हिंदी शायर वेबसाइट पर देख सकते हैं

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