अंगड़ाई शेर दुनिया के बेहतरीन शेर ये पढ़कर मज़ा आ जायेगा

अंगड़ाई शेर दुनिया के बेहतरीन शेर ये पढ़कर मज़ा आ जायेगा

किसी रचनाकार का सौन्दर्यबोध कब, कहां और किस रूप में जग जाये, इसका अंदाजा लगाना साधारणजन के लिए सहज नहीं है। किसी शायर की कल्पना महबूब के देह भाषाओं, इशारे या किसी अन्य गतिविधियों के साथ यात्रा करने लगती है। ‘अंगड़ाई‘ पर उर्दू शायरों के जज़्बात तो आसमान छूते हैं।  शेरों-शायरी की आज की कड़ी में पाठकों के लिए पेश है 40+ बेहतरीन अंगड़ाई शेर, Angadai sher-o-shayari, Best Hindi Sher, Best Hindi Shayari, Best Urdu Shayari, Urdu Aangadai Sher, Hindi Shayar Website,अंगड़ाई शेर शायरी


तन्हाई अंगड़ाई शेर

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की 
तुम क्या समझो, तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की 

क़तील शिफ़ाई


अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो
वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी

जॉन एलिया


चाँद अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेता है
अंगड़ाई ये किसने ली अदा से
कैसी ये किरन फ़ज़ा में फूटी

-जाँ निसार अख़्तर


अंगड़ाई भी वो लेने न पाए उठा के हाथ
देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ

-निज़ाम रामपुरी


चाँद अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेता है जोबन के बीच
मद्धम मद्धम दीप जले हैं सोए सोए नयन के बीच

-अहसन अहमद अश्क़


चाह लकीरों से अदा करता है – अंगड़ाई शेर

ढलकी शानों से हर यक़ीं की क़बा
ज़िंदगी ले रही है अंगड़ाई

-जावेद अख़्तर


जिस्म की चाह लकीरों से अदा करता है
ख़ाक समझेगा मुसव्विर तेरी अंगड़ाई को

-वसीम बरेलवी


अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की

– परवीन शाकिर


इस शहर का मंज़रनामा – अंगड़ाई शेर

सुर्ख़ ही सुर्ख़ है इस शहर का मंज़रनामा
अम्न होते ही फ़सादात ने अंगड़ाई ली

-तसनीम फ़ारूक़ी


सितारे सो गए अंगड़ाई लेकर
कि अफ़्साने का अंजाम आ रहा था

– अब्दुल हमीद ‘अदम’


दोनों हाथों से लूटती है हमें
कितनी ज़ालिम है तेरी अंगड़ाई

-जिगर मुरादाबादी


मस्ती में तेरी अंगड़ाई – अंगड़ाई शेर

जहाँ भी था कोई फ़ित्ना तड़प के जाग उठा
तमाम होश थी मस्ती में तेरी अंगड़ाई

– नासिर काज़मी


प्यार की कहकशाँ लेती थी अंगड़ाई जहाँ
मोड़ नफ़रत के उसी राहगुज़र में आए

– कैफ़ी आज़मी


लेती हुई अंगड़ाई अगर घाट पे आए
गंगा की हर इक लहर में इक धूम मचा दे

– जोश मलीहाबादी


जज़्बात ने अंगड़ाई ली – अंगड़ाई उर्दू शेर

सुन चुके जब हाल मेरा ले के अंगड़ाई कहा
किस ग़ज़ब का दर्द ज़ालिम तेरे अफ़्साने में था

– शाद अज़ीमाबादी


फिर तेरे हिज्र के जज़्बात ने अंगड़ाई ली
थक के दिन डूब गया रात ने अंगड़ाई ली

-तसनीम फ़ारूक़ी


कौन अंगड़ाई ले रहा है ‘अदम’
दो जहाँ लड़खड़ाए जाते हैं

-अब्दुल हमीद ‘अदम’


जिन्हें तेरी मुल्तफ़ित नज़रें – अंगड़ाई शेर

फिर ख़मोशी ने साज़ छेड़ा है
फिर ख़यालात ने ली अंगड़ाई

– जावेद अख़्तर


सुला गईं थीं जिन्हें तेरी मुल्तफ़ित नज़रें
वो दर्द जाग उठे फिर से ले के अंगड़ाई

-साहिर लुधियानवी


या रब वो जवानी भी क्या महशर-ए-अरमाँ थी
अंगड़ाई भी जब लेती एक आँख झपक जाती

– मजाज़ लखनवी


 

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