अंगड़ाई पर लिखी गज़ब की शायरियां आपके दिल को छू जायँगी

अंगड़ाई शायरी

शायर और रचनाकारों की कल्पना-शक्ति ने बदन की साधारण और सामान्य क्रियाओं को भी हुस्न के दिलचस्प आख्यान में रूपांतरित कर दिया है । असल में अंगड़ाई बदन की साधारण और सामान्य क्रियाओं में से एक है लेकिन शायरों ने अलग से इसके सौन्दर्यशास्त्र की पूरी किताब लिख दी है और अपने ज़हन की ज़रख़ेज़ी और उर्वरता का अदभूत एवं अद्भुत सबूत दिया है।

किसी रचनाकार का सौन्दर्यबोध कब, कहां और किस रूप में जग जाये, इसका अंदाजा लगाना साधारणजन के लिए सहज नहीं है। किसी शायर की कल्पना महबूब के देह भाषाओं, इशारे या किसी अन्य गतिविधियों के साथ यात्रा करने लगती है।  ‘अंगड़ाई’ पर उर्दू शायरों के जज़्बात तो आसमान छूते हैं।  शेरों-शायरी की आज की कड़ी में पाठकों के लिए पेश है ‘अंगड़ाई’ पर शेर

अंगड़ाई के संदर्भ में उर्दू शायरी के कुछ हिस्से तो ऐसे हैं कि मानो अंगड़ाई ही हुस्न की पूरी तस्वीर हो। अपने महबूब की अंगड़ाई का नज़ारा और उसकी तस्वीर बनाती हुई चुनिंदा शायरी का एक संकलन यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है। अंगड़ाई शायरी, Angadai Shayari, Best Angadai Shayari, Angadai Sher-o-Shayari, Hindi Shayar, Urdu Shayar, Best Shayari Website, महबूब की अंगड़ाई, Love Yawning Shayari

अंगड़ाई शायरी उर्दू में

कौन अंगड़ाई ले रहा है ‘अदम’
दो जहाँ लड़खड़ाए जाते हैं

अब्दुल हमीद अदम


कौन ये ले रहा है अंगड़ाई
आसमानों को नींद आती है

फ़िराक़ गोरखपुरी


क्या क्या दिल-ए-मुज़्तर के अरमान मचलते हैं
तस्वीर-ए-क़यामत है ज़ालिम तिरी अंगड़ाई

राम कृष्ण मुज़्तर


अंगड़ाई शायरी हिंदी में

क्यूँ चमक उठती है बिजली बार बार
ऐ सितमगर ले न अंगड़ाई बहुत

साहिल अहमद


लुट गए एक ही अंगड़ाई में ऐसा भी हुआ
उम्र-भर फिरते रहे बन के जो होशियार बहुत

क़ैस रामपुरी


पयाम-ए-ज़ेर-ए-लब ऐसा कि कुछ सुना न गया
इशारा पाते ही अंगड़ाई ली रहा न गया

यगाना चंगेज़ी


शाख़-ए-गुल झूम के गुलज़ार में सीधी जो हुई
फिर गया आँख में नक़्शा तिरी अंगड़ाई का

आग़ा हज्जू शरफ़


Angadai Shayari English

शायद वो दिन पहला दिन था पलकें बोझल होने का
मुझ को देखते ही जब उस की अंगड़ाई शर्माई है

जौन एलिया


सुन चुके जब हाल मेरा ले के अंगड़ाई कहा
किस ग़ज़ब का दर्द ज़ालिम तेरे अफ़्साने में था

शाद अज़ीमाबादी


तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो
आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना

शकील बदायुनी


शैख़-साहिब की नसीहत भरी बातों के लिए
कितना रंगीन जवाब आप की अंगड़ाई है

साग़र ख़य्यामी


तुम फिर उसी अदा से
अंगड़ाई लेकर हंस दो

आ जायेगा पलट कर
गुजरा हुआ ज़माना

शकील बदायुनी


 

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